सिंहपर्णी Taraxicum Officinalis

                                               सिंहपर्णी Taraxicum Officinalis

                               

नाम :-बाटनिकल्‍स नेम तारैक्‍सैकम ओफिसिनलिस

परिवार :- एस्‍टेरेसिया ,

अन्‍य नाम:- डंडेलियन, दुग्‍धफेनी  

फ्रेंच:- डेंट,डी लायन अर्थात शेर का दॉत

आर्युवेद मतानुसार:- 


त्‍वचा रोगों :- सिंहपर्णी की टहनीयों को बीच से तोडा जाये तो इसके अन्‍दर दूधियॉ सफेद रस निकलता है जो त्‍वचा के लिये बहुमूल्‍य है । यह त्‍वचा रोगों के साथ त्‍वचा में खुजली, जलन, एग्‍जिमा, तथा चोटों के निशानों जैसी समस्‍याओं को दूर करती है । परन्‍तु इसका रस ऑखों के लिये हानिकारक होता है एंव यह बुढापे को नजदीक आने से रोकता है । इसके फूलों के सूप का प्रयोग झांईयों को दूर करने में किया जाता रहा है एंव सुन्‍दरता के निखार के लिये इसका प्रयोग चहरे पर लगाने व सूप का प्रयोग हर्बल उपचार आदि में किया जाता रहा है । इसके प्रयोग से त्‍वचा और त्‍वचा के रंग में निखार आता है त्‍वचा मुलायम चमकदार हो जाती है साथ ही यह त्‍वचा के स्‍ट्रेच को दूर करता है । इसमें जीवाणु रोधी गुण पाये जाते है यह टयूमर को रोकता है तथा उसका उपचार करता है । मसूढों में रहने वाली सूजन व दर्द को कम करता है । मुंहासे, फटी रक्‍त वाहिकाओं से चकते, लाल धारीयॉ, एव त्‍वचा के रंग में सुधार होता है, इसमें ऐसे तत्‍व पाये जाते है जो कोशिकाओं को जल्‍दी भरते है अत: हम कह सकते है कि यह उतको को त्‍वरित पुर्नजीवन करने में अपनी अहम भूमिका का निर्वाह करती है । इसीलिये इसके उपयोग से त्‍वचा के निशान व मुंहासे आदि के निशान जल्‍दी ठीक हो जाते है यह तेलीय त्‍वचा के लिये विशेष रूप से अच्‍छा व प्रभावी है ।

 विटामिन :- इसमें भरपूर्ण मात्रा में विटामिन सी ,, पाया जाता है, जो लीवर के लिये बहुत अच्‍छा होता है । इसके साथ इसमें फाईबर, तथा पोटेशियम भी पाया जाता है जो ब्‍लड प्रेशर को नियमित करता है । इसके साथ यह ब्‍लड प्रेशर को कंट्रोल करता है एंव यह कोलेस्‍ट्राल को कम तथा कंट्रोल करता है । यह पिताश्‍य की बीमारी तथा सूजन को कम कर के पित्‍ताश्‍य की थैली की समस्‍याओं तथा ब्‍लॉकेज को दूर करता है ।

इम्‍यूनिटी :- सिंहपर्णी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढाती है तथा रोगाणुओं एंव फंगस से लडने में सहायता करती है

कैंसर:- सिंहपर्णी के हर हिस्‍से में एन्‍टी आक्‍सीडेन्‍स गुण होता है जो कैंसर विरोधी है, यह कैंसर की ग्रोथ को धीमा कर देती है , इसकी पत्‍तीयों में एन्‍टी आक्‍सीडेंट और Phytonutriens होते है जो कैंसर से लडने में मदद करते है ।

ब्‍लड शुगर :- यह ब्‍लड शुगर एंव इंसुलिन लेबिल को संतुलित करता है । सिंह पर्णी के प्रयोग से पेशाब बहुत अधिक मात्रा में होती है जो बढे हुऐ ब्‍लड प्रेशर को कम कर देती है, इसके साथ इसमें फाईबर, तथा पोटेशियम भी पाया जाता है जो ब्‍लड प्रेशर को नियमित करता है । इसके साथ यह ब्‍लड प्रेशर को कंट्रोल करता है एंव यह कोलेस्‍ट्राल को कम तथा कंट्रोल करता है ।

शरीर से विषैले पदाथों को बाहर निकालना:-  यह शरीर के अतरिक्‍त गर्मी को दूर करता है तथा शरीर से विषैले पदार्थो को निकालता है । Phytoflavonoids जो पौधे के रस में पाया जाता है एंव यह रक्‍त वाहिकाओं की दीवारों को मजबूत करता है एंव हिद्रय प्रणाली की स्थिती  पर लाभकारी प्रभाव डालता है ।

टिंचर तैयार करना:- सिंहपर्णी जल्‍दी से मुरझा जाती है , अप्रेल के अंत में केवल तीन सप्‍ताह मई की शुरूआत में , बसन्‍त मे सिंहपर्णी की जड में केवल २ प्रतिशत इंसूलीन होता है , लेकिन शरद ऋतु में यह मात्रा बढकर २४ से ४० प्रतिशत हो जाती है , इसलिये पौधे की जड को अक्‍टुबर नवम्‍बर की शुरूआत में खोदा जाता है । बसन्‍त में फूलों के समय इसकी जड उपयुक्‍त है अगस्‍त में पत्‍ते अपना रस खो देते है मई से जुलाई तक भी उन्‍हे उपयोग या काटा जा सकता है  इसके रस के  उपयोग से झांईया ओैर उम्र के धब्‍बे से छुटकारा मिल जाता है  ।

वैज्ञानिक परिक्षण परिणाम :- सिंहपर्णी में ऐसे अनेक तत्‍व निहित है जो त्‍वचा को पोषित कर उसे एक नया जीवन प्रदान करते है , एंव त्‍वचा को मुलायम , चमकदार बनाते है ,इसमें पाये जाने वाला एल्‍कलाईड त्‍वचा के पोषण व स्‍वस्‍थ्‍य बनाये रखने में अति उपयोगी है । इसके रस का उपयोग दाद, खॉज, त्‍वचा रोग व त्‍वचा विकारों में लगाने में किया जा सकता है । सन् २०१२ में प्रकाशित पेप्‍टाईडस की रिर्पोट के अनुसार इसके फूलों में तीन प्रकार के प्रभावी पेप्‍टाईडस होते है जो शरीर में हो रही माइक्रोबियल और फंगल गतिविधियों पर रोक लगाते है यह एक अच्‍छा आक्‍सीडेंस और डिटाक्‍सीफायर है इसलिये मुंहासों के उपचार में इसका सफलता पूर्वक उपयोग किया जाता है ,यह एक अच्‍छा आक्‍सीडेंटस है जो शरीर की कोशिकाओं को कैंसर की वजह से पहुंचने वाली क्षति का पूर्ण रूप से विरेाध करती है ,यह अपनी फ्रीरेडिकल्‍स क्षमता के कारण विभिन्‍न प्रकार के कैंसरों को मात देने में सक्‍क्षम है । सन् २०११ में साक्ष्‍य के आधार पर सिंहपर्णी की जड कैंसर से लडने के लिये कीमोथैरेपी जितना सक्षम है । यह मूत्र वर्धक है एंव शरीर की सूजन व जलन को कम करती है । इसमें उचित मात्रा में पोटैशियम पाया जाता है जो शरीर में सोडियम के स्‍तर को संतुलित कर सूजन व जलन से छूटकारा दिलाता है ।

सिंहपर्णी बहुत ही सक्‍क्षम मूत्रवर्धक है जो किडनी एंव मूत्र पथ में उपस्थित विषाक्‍त पदार्थो का नाश कर मूत्र सम्‍बधित विकारों से बचाव करता है । सिंहपर्णी के जड मूत्र की मात्रा के उत्‍पादन को नियमित कर किडनी को स्‍वच्‍छ एंव स्‍वस्‍थ्‍य रखने में मदद करती है ।यह मूत्रपथ में विकसित हो रहे हानिकारक जीवाणुओं का नाश कर मूत्र सम्‍बधित विकारों को शरीर में आने से रोकती है । मधुमेह के रोगीयों के लिये सिंहपर्णी की जड बहुत उपयोगी है यह पैक्रियाज को उत्‍तेजित इंसुलिन के उत्‍पादन में मदद करती है और रक्‍त शुगर के स्‍तर को नियंत्रित करती है । इसकी जड मूत्रवर्धक होती है और अधिकतम शुगर को शरीर से मूत्र द्वारा निकास करवा कर रक्‍त को अधिक शुगर से छुटकारा दिलाती है । मधुमेह के रोगी बहुत ही जल्‍दी लीवर एंव किडनी के विकारों से ग्रस्‍त हो जाते है सिंहपर्णी किडनी एंव लीवर दोनों के लिये स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक है । इसके अलावायह मोटापे को घटाती है । मूत्रवर्धक होने से शरीर में जमे पानी को यह निकालती है इसके साथ यह भूंख को कम करती है । कोलेस्‍ट्राल को नियंत्रित करती है साथ ही कैलेारीज भी कम होती है । यह मूत्रवर्धक होने के साथ सोडियम से छूटकारा पाने में सहायता करती है एंव उच्‍च रक्‍तचाप को कम करने में मदद करती है उच्‍चरक्‍त चाप के पीछ कोलेस्‍ट्राल भी एक बहुत बडा कारण होता है चूंकि सिंहपर्णी में पोटेशियम और फाईबर का एक अच्‍छा स्‍त्रोत है इससे हिद्रय रोग होने का खतरा भी कम हो जाता है । यह पाचक प्रणाली पर भी प्रभावी है यह एक रेचक के रूप में भी कार्य करता है यह पाचन शक्ति को उत्‍तेजित कर भूंख में सुधार लाता है यह पेट के हानिकारण किटाणुओं का नाश करता है और अच्‍छे बैक्‍टेरिया को उत्‍पादित करने में सहयेाग करता है इसमें फाईबर प्रचुर मात्रा में होने से यह कब्‍ज से छुटकारा दिलाता है ।सिंहपर्णी की जड एन्‍टी आक्‍सीडेंन्‍ट का एक बहुत ही अच्‍छा स्‍त्रोत है जो शरीर की हडिडीयों को पोषित कर उन्‍हे उम्र सम्‍बधित विकारों से छुटकारा दिलाता है सिंह पर्णी की जडों में उच्‍च मात्रा में कैल्‍शियम पाया जाता है जो हडियों के विकास एंव मजबूती के लिये अनुवार्य है । इसमें विटामिन के भी होताहै जो हड्डीयों के स्‍वास्‍थ्‍य को बनाये रखता है । लीवर के लिये उपयोगी टॉनिक है विटामिन ए ,जस्‍ता , विटामिन सी , आयरन, विटामिन बी, तॉम्‍बा , विटामिन डी , कैल्‍शीयम , विटामिन ई , और पोटेशियम तथा मैग्‍नेशियम पाया जाता है । इसमें विटामिन मिनरल्‍स तथा फाईबर का खजाना है । इसमें बीटा कैरोटिन नामक एन्‍टी आक्‍सीडेन्‍स होता है , जो सैल्‍स को डैमेज होने आक्‍सीडेटिव स्‍ट्रेस से बचाने का काम करता है । इसमें पॉलीफेनोल नामक बायोएक्टिव कम्‍पाउड होते है जो सूजन को कम करने में उपयोगी होते है । कुछ शोध बतलाते है कि सिंहपर्णी मेंएन्‍टी माइक्रोबियल और एटी बायरल प्रापर्टीज होती है जो शरीर को किसी भी तरह के इंफेक्‍शन से लडने में मदद करती है ।

होम्‍योपैथिक मटेरिया मेडिका में इसका उल्‍लेख कम ही मिलता है, परन्‍तु होम्‍योपैथिक में यह दवा मदर टिंचर में उपलब्‍ध है ।  

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