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Showing posts from September, 2022

GENTIANA LUTEA- जेटियाना लुटिया

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         GENTIANA  LUTEA-   जेटियाना लुटिया जेटियाना लुटिया यह जडी बुटी वाला एक बारहमासी पौधा है इसकी लम्‍बाई एक से दो मीटर तक होती है जिसमें भालाकार से लेकर अण्‍डाकार की पत्तियॉ होती है जिसकी लम्‍बाई १० से ३० से0मी0 होती है तथा इसकी चौडाई ४ से १२ से0मी0 होती है । तथा इसके फूल पीले रंग के होते है यह घास वाले चारागाहों में उगते है । इसके हर हिस्‍से में कडवाहट होती है , इसका नाम जेटियन नाम के एक राजा के नाम से लिया गया है जिसने सबसे पहले इस पौधे की पहचान की एंव इसका उपयोग जडी बूटी के रूप में किया था ।     इसे ग्रेटयेलो , जेटियाना लुटिया , जेंटियन , विटररूट , बिटरवॉर्ट , जेनेसियाना , आदि नामों से भी जाना जाता है   इसमें ग्लाईको साईडस , एमार्जेटिन और जेटि ओपिक्रिन पाया जाता है । इसका हर हिस्से में कडवाहट होती है , कभी कभी शराब बनाने में इसका उपयोग किया जाता है । इरानी परम्परागत चिकित्सा में इसका उपयोग मूत्र प्रतिधारण , मासिकधर्म , यकृत और प्लीहा की शिथिलता में किया जाता है ,   बिच्छू , पिट वाईपर जैसे जहरीले जानवारों के काटने पर जड ...

CONIUM MACULATU हेमलॉक

                                          CONIUM  MACULATU     हेमलॉक   MACULATU ] हेमलॉक –कोनियम एक विष है जिसे ग्रीस के दार्शनिक सुकरात को मृत्‍यु दण्ड देने हेतु इसका प्‍याला पीने को दिया गया था इसके पीने से सर्व प्रथम उनके पैर शून्‍य हो गये धीरे धीरे यह पक्षाघात के रूप में ज्‍यो ज्‍यो इस विष का असर होता गया पक्षाघात नीचे से उपर की तरुफ होता गया इस समय उनका मस्तिक ठीक से काम करता रहा पक्षाघात की यह अवस्‍था सिर तक पहुंचने पर सुकरात की मौत हो गयी । इसका प्रयोग होम्‍योपैथिक चिकित्‍सा विधान के अनुसार इसी प्रकार के लक्षणों में किया जाता है होम्‍योपैथिक में चूंकि इसकी मारक मात्रा को खत्‍म कर प्रयोग करते है इसे इतना तनुकृत करते है ताकि विष की मात्रा खत्‍म हो जाये । डॉ0सत्यवृत का कहना है कि इस औषधीय का शरीर की गृन्थियों पर विशेष प्रभाव है । पक्षाधात , जननेन्द्रीय की दुर्बलता , जननांगों की शिथिलता , रोशनी का सहन न करना , किसी भी गृन्थी का कडा पड जाना , पेशाब क...

CINCONA SUCCIRUBA

  .                                        CINCONA   SUCCIRUBA  CINCONA  SUCCIRUBA & शाम के वक्त ठंड देकर बुखार आने पर यह श्रेष्ठ दवा है । कई  बीमारीयों के कारण रोगी दुर्बल हो गये हो जिनके सिर में इतना र्दद रहता हो मानो सिर फट जायेगा , नींद न आती हो तथा ऑखों के सामने काले धब्बे आते हो उन सभी रोगियों को यह लाभ पहुचाती है हिदय में र्दद हो फेफडो से रक्त आता हो दमा का रोग आदि में इसका उपयोग किया जाता है ।

CINCONA CALISAYA (Peruvian Bark)

                               CINCONA  CALISAYA (Peruvian Bark )   CALISAYA (Peruvian Bark ) &   यह दवा ठंड देकर बुखार आने पर जिसमें चेहरा मुरझाया हुआ मुंह शुष्क हो यह इसकी श्रेष्ठ दवा है । यह दवा पेट की गैस को ठीक करती है, तथा उपदंश रोग में प्रयोग की जाती है जिन रोगीयों के सिर में भारीपन रहता है और जो बहुत चिडचिडे रोते है उनको लाभ पहुचाती है , जिन रोगीयों के पेट में ऐसिड अधिक बनती हो उनको भी इससे लाभ होता है । ऑखों में र्दद कान में र्दद आदि में इसका उपयोग होता है ।  

CHAMOMILLA& जर्मन चमेली

                                       CHAMOMILLA & जर्मन चमेली , इस दवा के सेवन से स्वाभाव में तूफान ले आता है डा0 क्लार्क ने न्युसेरी कहा है एकोनाईट से ब्लड सर्कुलेश , बेलाडोना से बे्रन ट्रमोइ्र्रल , कैमोमिला से टेम्पर ट्रमोइ्र्रल होता है । पीलिया या अन्य रोग जो क्रोध या अक्रोश से उत्पन्न होते है र्दद शान्त करने के लिये   भी यह उत्तम दवा है र्दद के स्थान में शून्यपन , बच्चों के पेट तथा आतों के फूलने सा र्दद , पेट र्दद , गठिया के र्दद में ।

AGARICUS MUSCARIUS कुकुरमुत्ता

                      AGARICUS  MUSCARIUS कुकुरमुत्ता  . एगारिकस जिसका अर्थ छत्रक होता है यह छत्रक वास्तविक मृतभक्षी नही है । इसका इसका कवक जाल या धासों की जडों पर मुख्य रूप् से चारागाहों की मिटटी (जैव द्रवों से भरपूर) और खादों पर पडी गीली छायेदार लकडी के उप पैदा होता है । इसमें तैलीय मात्रा अधिक होती है । अतः विटामिन ए से भरपूर होता है   कुकुरमुत्ता सम्पूर्ण शरीर की रक्त वाहिनियों पर अपना प्रभाव र्दशाता है इसका दूसरा प्रभाव मांसपेशियों पर तथा शिथिलता को दूर करता है । एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक जेरार्ड 1957   ने एगैरिकस के रोग शामक गुणों का विस्तृत विवेचन करते हुऐ कहॉ है इसमें दमा , पीलिया तक ठीक हो सकते है । कम्पन्न वाल हाथ पैर बिना इक्छा के हिलते रहना , अकडन ।

Arnica Montona आर्निका माटोना

                                  Arnica Montona  आर्निका माटोना ] Arnica Montona आर्निका माटोना - बुल्फ्रस वैन , लेपछर्डस वैन , माउटेन तम्बाखू इसके बडे पीले    रंग के फूल होते है , पैाधे में सक्रिय धटक  फ्वेवोनोइडस होता है । मासपेशियों में र्दद सूजन , धॉवों को ठीक करता है गठिया और सूजन के उपचार में। र्दद वाले फोडा फुंसियों पर , चोट लग जाने के कारण एपेलेक्सी र्मिगी या दिमाक में खून की नली का फट जाना या खून संचार का रूक जाना , आधात या खॉसी से रक्त स्त्राव छोटी छोटी फुंसियों का निकलते रहना , इसके लक्षणों में शरीर का उपरी हिस्सा गर्म होता है किन्तु निचला हिस्सा ठंडा होता है । चोट लगने की वजह से मिरगी , ऐठन , हिद्रय की धडकन , नकसीर आदि में इसका प्रयोग होता है । होम्‍येापैथिक में इसका प्रयोग चोट लगने या कुचल जाने की वजह से उत्‍पन्‍न समस्‍याओं पर या चोट लगने के कारण किसी भी रोग जैसे मिरगी ( ऐठन या अन्‍य किसी भी प्रकार के रोग क्‍यो न हो यदि उसके रोग का कारण चोट लगने के बाद उत...

AESCULUS HIPPOCASTANUM – बानखोर,

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                  AESCULUS  HIPPOCASTANUM  – ] बानखोर , AESCULUS  HIPPOCASTANUM  – ]  बानखोर , भडुर , होर्स चेस्ट नट -   मल द्वार की   शिराओं   में रक्त का   संचय हो जाना यह दवा बादी एंव खूनी बबासीर में उपयोगी है । जहॉ कही भी रक्त संचय होकर लाल नीले रंग का रूधिर दिचो चाहे वह बबासीर में हो या मस्सों में या घॉवों में हो यह दवा उपयोगी है । रक्त संचाय के के कारण किसी भी स्थान में भारीपन , ऑखों में शिराओं की सूजन में , कमर के बीच की त्रिकास्थि (सेक्रम) में र्दद , इस दवा का प्रभाव निचली ऑत पर होता है बबासीर के रोग में शिराओं के फूलने व उसमें से रक्‍त निकलना या उसमें रक्‍त का संचय होना , शरीर की सभी क्रियाये पाचन हिदय की गति मंद पड गई हो तो ऐसे में यह दवा उपयोगी है । रोगी उदास व‍ चिडचिडा , सास लेने में ठंडी वायु का अहसास होना , ऑखे भारी तथा गरम होना तथा उसमें से पानी निकलता हो ,  नेत्र गोलक में र्दद , मुंह का स्‍वाद कसैला अधिक लार जीभ पर मोटी परत का जमा होना , अमाश्‍य में ऐसा महसूसहोना जैसे पत्‍...

AVENA SATIVA (Minor Cereuis)

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        AVENA SATIVA (Minor Cereuis)        निम्न कोटी की धान , इसे जई धान भी कहा जाता है ,   गरीब तबके के लोग इसका उपयोग करते थे , यहा (Gramineac) -कुल का सदस्य है , इसमें सबसे अधिक प्रोटीन , वसा तथा खनिज पदार्थ पाये जाते है यह गरीब मनुष्यों तथा पशुओं का भोजन है इसका उपयोग विशेष रूप से बिस्कुट बनाने में किया जाता है । यह दवा नाडी संस्थान तथा मस्तिष्क पर अच्छा प्रभाव रखती है तथा इन अंगों को शक्ति प्रदान करती है । यदि किसी रोगी की नाडियॉ कमजोर हो गई हो तथा जननइद्धियॉ कमजोर हो गई हो , तो यह दवा इस प्रकार की कमजोरी को दूर कर देती है । यह दवा बूढे लोगों की अच्छी दवा है यदि किसी रोगी के   हाथ पैर कॉपते हो तो यह दवा उत्तम लाभ पहुचाती है । मिर्गी रोग के लिये तो यह दवा उत्तम है , यदि किसी पुरूष को नामर्दी का रोग हो तो उसको यह अवश्य सेवन करना चाहिये यदि किसी स्त्री को खुल कर मासिक धर्म के साथ र्दद हो यह दवा उसे ठीक कर देती है सुस्ती आल्स्य , नीद थकान , अंजाने में सीमन निकल जाना अत्याधिक स्पर्माटोरिया के कारण इंपोटेशी का कम हो ...